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द टेलीग्राफ

टेलीग्राफ पूर्वी भारत का सबसे बड़ा परिचालित और सबसे अधिक पढ़ा जाने वाला अंग्रेजी अखबार है। 2017 के सर्वेक्षण के इंडियन रीडरशिप सर्वे के अनुसार, शीर्ष 10 अंग्रेजी दैनिक समाचार पत्रों में 1.5 मिलियन से अधिक पाठकों के साथ अखबार सातवें स्थान पर है। यह आनंद बाजार पत्रिका एबीपी, समूह द्वारा प्रकाशित किया जाता है, इसकी स्थापना 1922 में आजादी के बाद में प्रफुल्ल कुमार सरकार द्वारा की गई थी। अखबार का दावा है कि अकेले कलकत्ता में उसकी पाठक संख्या उसके सभी प्रतिस्पर्धियों की तुलना में अधिक है।

मुख्य तथ्य

श्रोतागण शेयर

0.25%

स्वामित्व प्रकार

निजी

भौगोलिक कवरेज

राष्ट्रीय

सामग्री प्रकार

भुगतान किया हुआ

डेटा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है

स्वामित्व डेटा अन्य स्रोतों से आसानी से उपलब्ध है, उदाहरण सार्वजनिक रजिस्ट्रियां आदि

2 ♥

मीडिया कंपनियों / समूह

एबीपी प्राइवेट लिमिटेड

स्वामित्व

स्वामित्व - ढाँचा

टेलीग्राफ एबीपी प्राइवेट लिमिटेड द्वारा प्रकाशित किया जाता है। एबीपी प्राइवेट लिमिटेड के शेयरों को सरकार परिवार के 4 सदस्यों में बांटा गया है, अवीक कुमार सरकार 19.5%, अरूप सरकार 19.5%, अतीदेव सरकार 19.5% और शिथिल सरकार 19.5%। शेष 21.9% शेयर एबीपी होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड के पास हैं।
एबीपी होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड के शेयरों को चार परिवार के सदस्यों में विभाजित किया गया है, अवीक कुमार सरकार 25%, अरूप सरकार 25%, शिती सरकार 25% और अतीदेव सरकार 25%। इसलिए, परिवार एबीपी होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड के 100% हिस्से को नियंत्रित करता है, यानी एबीपी प्राइवेट लिमिटेड में इसकी 21.9% हिस्सेदारी है।
इसलिए, एबीपी प्राइवेट लिमिटेड की कुल 99.99% हिस्सेदारी में सरकार परिवार का नियंत्रण है।

मताधिकार

अनुपलब्ध डेटा

व्यक्तिगत स्वामी

मीडिया कंपनियों / समूह
तथ्य

सामान्य जानकारी

स्थापना वर्ष

1982

संस्थापक संबद्ध व्यवसाय

प्रफुल्ल कुमार

अंग्रेजी अखबार द टेलीग्राफ के प्रकाशक हैं, आनंदबाजार पत्रिका के संस्थापक हैं, द टेलीग्राफ की स्थापना 1922 में हुई थी। वह एक राष्ट्रवादी थे और उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ विरोध के प्रतिबिंब के रूप में अखबार शुरू किया। प्रफुल्ल कुमार सरकार को उनके राष्ट्रवादी विचारों के लिए कई बार जेल जाना पड़ा।
सुरेश चंद्र मजूमदार: आनंदबाजार पत्रिका के सह-संस्थापक और प्रोपराइटर थे।

सी ई ओ संबद्ध व्यवसाय

दीपांकर पुरकायस्थ

प्रबंध निदेशक और आनंद बाजार पत्रिका, एबीपी प्राइवेट लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं। एबीपी अखबार की प्रकाशन कंपनी है। पुरकायस्थ एक लागत और प्रबंधन लेखाकार है और अपने 37 वर्षों के पेशेवर जीवन मे वह 34 वर्षों तक कंपनी के साथ रहे है। वह अन्य हितों में, वैन इन्फ्रा की केंद्रीय सलाहकार समिति के अध्यक्ष हैं यह यूरोप, एशिया, मध्य पूर्व और अफ्रीका में मौजूद अखबारों का एक संघ है। इसके अलावा, वह मीडिया कंटेंट एंड कम्युनिकेशन सर्विसेज कंपनी के ब्रॉडकास्टिंग आर्म एबीपी न्यूज़, एबीपी आनंद और एबीपी माझा के निदेशक के रूप में कार्य करते हैं।

मुख्या संपादक संबद्ध व्यवसाय

आर.राजगोपाल

टेलीग्राफ के प्रधान संपादक हैं। संबंधित हितों की कोई जानकारी नहीं मिली।

अन्य महत्वपूर्ण लोग संबद्ध व्यवसाय

अवीक कुमार सरकार

एबीपी ग्रुप ऑफ पब्लिकेशन्स के संपादक और संपादक एमेरिटस हैं। वह आनंद बाज़ार पत्रिका के मालिक अशोक कुमार सरकार के बेटे हैं और आनंद बाज़ार पत्रिका के संस्थापक प्रफुल्ल कुमार सरकार के पोते हैं। वह कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक हैं, ब्रिटेन में रहते हुए द संडे टाइम्स के संपादक सर हेरोल्ड इवांस के मार्गदशन मे प्रशिक्षण प्राप्त किया। उन्हें एबीपी समूह को एक क्षेत्रीय इकाई से एक राष्ट्रीय प्लेयर के रूप में बदलने का श्रेय दिया जाता है।
पेपर टाइगर्स पुस्तक के लेखक, निकोलस कोलेरिज ने अपनी पुस्तक में अवीक सरकार को "भारत के सबसे परिष्कृत समाचार पत्र के मालिक" के रूप में वर्णित किया है, वह आगे कहते हैं कि उनके बेमिशाल पसंद का पता खाने की मेज से कपड़ों की अलमारी तक लगाया जा सकता है। अवीक सरकार द प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (पीटीआई), एबीपी न्यूज नेटवर्क प्राइवेट लिमिटेड, सीमा गैलरी प्राइवेट लिमिटेड और सरकार कंसल्टेंट्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक भी हैं।

संपर्क करें

6 प्रफुल्ल सरकार स्ट्रीट, चौरंगी स्ट्रीट, बो बैरक,

कोलकाता 700001 भारत

टेलीफोन : +91 33 22345374, 22216600, 22378000

वेबसाइट: www.telegraphindia.com

 

वित्तीय जानकारी

राजस्व (मिलियन डॉलर में)

डेटा अनुपलब्ध

परिचालन लाभ

डेटा अनुपलब्ध

विज्ञापन (कुल धन का%)

डेटा अनुपलब्ध

मार्केट शेयर

डेटा अनुपलब्ध

अतिरिक्त जानकारी

मेटा डेटा

वह स्वामित्व डेटा कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय से फाइलिंग से किया गया था। यहां यह नोट करना महत्वपूर्ण है कि डेटा 2016 से 2017 के रिकॉर्ड की फाइलिंग पर आधारित है। एमओएम टीम ने 10 जनवरी 2019 को ईमेल भेजा और उसके बाद 1 फरवरी 2019 को एबीपी को पत्र भेजा जिसमें दस्तावेज़ में दिए गए डेटा की पुष्टि करने की मांग की गई। हमे कंपनी से अभी तक कोई जवाब नहीं आया है।

स्रोत मीडिया प्रोफाइल

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