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क्या भारत मे राष्ट्रीय और क्षेत्रीय की परिभाषा बदल रही है?

संदर्भ: राष्ट्रीय और प्रादेशिक मीडिया

भारत में, एक लोकप्रिय कहावत है – कोस- कोस पर बदले पानी, चार कोस पर बानी - तात्पर्य यह है कि भारत एक बहुआयामी संस्कृति भाषाई विविधता वाला देश है। 1.34 बिलियन लोगों का यह देश, विभिन्न क्षेत्रों में 121 भाषाएं बोलता है, जिनमें से 22 भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल हैं, जिसका अर्थ है कि वे आगे के विकास के लिए आधिकारिक मान्यता रखते है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, देश की आबादी के 44% हिस्से द्वारा बोली जाने वाली हिंदी को आधिकारिक राष्ट्रभाषा माना जाता है। भारत मे टेलीविज़न चैनलों समाचार पत्रों पत्रिकाओं के लिए सभी क्षेत्रीय भाषाओं मे एक उपर्युक्त स्थान होने के साथ साथ विभिन्न ब्रांड भी मौजूद हैं। यहाँ प्रस्तुत आंकड़े एक कहानी बताते  हैं-  भारत के समाचार पत्र रजिस्ट्रार के अनुसार, आरएनआई – 1149 हिंदी की पत्रिकाएँ हैं,  1703 मराठी (मराठी मुख्य रूप से महाराष्ट्र राज्य में बोली जाने वाली भाषा) और 1578 अंग्रेजी, 1509 गुजराती (गुजरात राज्य), 983 तेलुगु (तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में मुख्य रूप से बोली जाने वाली भाषा) रजिस्टर हैं।  

सूचना प्रसारण मंत्रालय 2016 के आंकड़ों के अनुसार, टेलीविजन क्षेत्र पर एक नजर डालें तो पता चलता है कि भारत में टीवी चैनलों की कुल संख्या 892 है, जिनमें से 380 से अधिक समाचार चैनल होने का दावा करते हैं। उन समाचार चैनलों में से प्रत्येक दस  दक्षिण भारतीय भाषाओं में तमिल (तमिलनाडु में मुख्य रूप से बोली जाने वाली भाषा), कन्नड़ (कर्नाटक में मुख्य रूप से बोली जाने वाली भाषा), तेलुगु और मलयालम (मुख्य रूप से केरल में बोली जाने वाली) हैं, लगभग चालीस हिंदी समाचार चैनल भी हैं।

भारत में राष्ट्रीय या मुख्यधारा मीडिया, जो मुख्य रूप से हैदराबाद और बेंगलुरु के अलावा मुंबई, दिल्ली, चेन्नई और कोलकाता जैसे महानगरीय शहरों में हिंदी टेलीविजन चैनलों और अंग्रेजी चैनलों के साथ संचालित होता है। हालांकि इंडिया टुडे ग्रुप, ज़ी मीडिया, नेटवर्क 18, एबीपी जैसे बड़े मीडिया हाउस लोकप्रिय हिंदी समाचार चैनल संचालित करते हैं, उनमें से कुछ एक क्षेत्रीय भाषा मे भी मजबूती से पैठ बनाए हुए है ।  

"राष्ट्रीय समाचार" और "स्थानीय या क्षेत्रीय समाचार" के बीच एक निश्चित अंतर है, वह समाचार जो बड़े शहरों के करीब होता है जहां दिल्ली, राजनीति तंत्रिका केंद्र, मे हो अथवा केंद्र का ध्यान आकर्षित करता हो, दूसरी ओर राज्य की राजधानियाँ, या दूसरे राज्य में राजनीतिक गर्माहट अथवा हलचल का बयान हो वह स्थानीय समाचार के अंतर्गत आता है। राष्ट्रीय बनाम क्षेत्रीय विभाजन में चैनलों की संख्या भी एक कहानी कहती है, जबकि मुख्यधारा के चैनल जो कि प्रमुखत: हिन्दी भाषी क्षेत्र में देखे जाते हैं वह सीमित संख्या मे हैं, जबकि  क्षेत्रीय समाचार चैनलों की संख्या में नाटकीय रूप से वृद्धि हुई है।

अखबार क्षेत्र आगे एक दिलचस्प अध्ययन की दरकार रखता है। अंग्रेजी दैनिक द टाइम्स ऑफ इंडिया, 13 मिलियन से अधिक की पाठक संख्या के साथ देश में अंग्रेजी दैनिक समाचार पत्रों में पहले स्थान पर है, जबकि यह केवल सबसे बड़े 20 दैनिक समाचार पत्रों के ग्यारहवें स्थान पर काबिज है। इस सूची मे  शर्ष पर हिंदी अखबार दैनिक जागरण है, इसके 70.37 मिलियन पाठक हैं। आश्चर्य नहीं कि शीर्ष 10 में भी तीन वर्नाक्यूलर समाचार पत्र हैं। 23 मिलियन पाठकों के साथ तमिल का डेली थांथी इस सूची में पांचवें स्थान पर है और एक अन्य समाचार पत्र मलयालम भाषा मे, मलयाला मनोरमा 15.9 मिलियन पाठकों के साथ सूची में आठवें स्थान पर है वहीं तेलुगु दैनिक ईनाडु 15.8 मिलियन पाठकों के साथ नौवें स्थान पर। यह संख्या अंग्रेजी या हिंदी में राष्ट्रीय आउटलेट्स पर क्षेत्रीय मीडिया की पसंद को इंगित करने वाला एक महत्वपूर्ण आँकड़ा है।   


प्रिंट रीडर्शिप संकेद्रण

प्रिंट रीडर्शिप संकेद्रण

भाषा बाज़ार

शीर्ष ५ में से २ मालिक

दर्शकों की हिस्सेदारी

कुल शेयर बाज़ार

हिंदी*

 
दैनिक जागरण
हिंदुस्तान
अमर उजाला
दैनिक भास्कर
 
76.45%45.45%

तमिल

 
दैनिक थांथी
दिनाकरन
 
66.66%8.58%
मराठी

लोकमत

सकाल
58.11%7.98%
अंग्रेजी *

टाइम्स ऑफ इंडिया

हिंदुस्तान टाइम्स हिन्दू द इकॉनॉमिक टाइम्स
75.15%6.11%
मलयालम मलयाला मनोरमा मातृभूमि 75.75%5.97%
तेलुगु ईनाडु साक्षी 71.13%5.75%
गुजराती  
गुजरात समाचार
संदेश
 
70.68%5.09%
बंगाली

आनंदबाजार पत्रिका

बर्तमान
73.90%4.93%
कन्नड़

विजय कर्नाटक

विजयवाणी
53.20%4.09%
उड़िया

संबाद समाज

59.46%3.34%
पंजाबी जग बानी अजित 82.64%1.60%
आसामी  
असोमिया प्रतिदिन
असोमिया खबर
 
59.89%

0.81%

 

उर्दू इंकलाब रोजनामचा राष्ट्रीय सहारा 59.68%0.30%

*10 में से 4 आउटलेट

 

 

चाहे समाचार पत्र हो या टेलीविजन चैनल, क्षेत्रीय स्तर पर इन आउटलेटों के स्वामित्व पर एक नजर डालें तो स्पष्ठ होता है कि क्षेत्रीय स्तर पर मीडिया आउटलेट्स का स्वामित्व, मुट्ठी भर लोगों के पास सिकुड़ कर रहा गया है। दक्षिण भारतीय राज्यों में टेलीविजन चैनलों में से प्रत्येक का स्वामित्व अलग-अलग संस्थाओं के पास है, यह वह अखबार हैं जिन्हें इस मीडिया स्वामित्व मॉनिटर इंडिया के एक भाग के रूप में अध्ययन किया है।

भारत भाषाई, सांस्कृतिक, जातीय रूप से विविध देश है और इसके मीडिया उपभोग की प्रवृत्तियाँ भी उतनी ही विविध हैं। यह कहना उचित होगा कि भारत में एक राष्ट्रीय मीडिया है जो अपने मुख्य हिंदी हार्टलैंड और अंग्रेजी मीडिया के साथ कुछ हिंदी बोलने वाले राज्यों को कवर करता है, और भौगोलिक पहुंच के संदर्भ में इसकी व्यापक उपस्थिति है फिर भी यह बड़ी संख्या के साथ नहीं है।  क्षेत्रीय मीडिया है - हालांकि अपने स्वयं के भूगोल में सीमित है, लेकिन दर्शकों के संदर्भ में शक्तिशाली है।

 

 

 


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